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Showing posts from July, 2020

CH-32: SOCIAL MEDIA

SOCIAL MEDIA "एक कचारा" मानव इतिहास के युग में ये युग हमेशा यादगार के रूप में दोहराया जाएगा, इस युग की गाथाएं एक अमर कहानी बन जाएगी I ऐसा बोलने के पीछे एक पुख्ता तथ्य है जिसे कुछ इस तरह से समझा जा सकता है, जैसे विकसित देशों में हर तरह के कयादे कानून बने है जिसका पालन वहा के नागरिक करते है और वो उनकी आदत मे शामिल हो जाता है, परन्तु भारत में कितने भी कायदे कानून क्यो ना बना लिए जाए सिर्फ़ उसका उपहास ही किया जाता रहा है, जैसे "कचारा" एक शब्द नहीं बल्कि एक सभ् ‍ यता का प्रतीक है कि वो किस तरह का है, और कहां से आ रहा है और कहा जाके समाहित होगा ? कुछ कचारा जो दिखता है, जिसका कोई ना कोई निस्तारण संभावित है परंतु उसका क्या जो दिखता नहीं I भारत देश पुरजोर लग के जुटा हुआ है दिखने वाले कचरे को साफ कैसे किया जाए I ना दिखने वाले कचरे को साफ करने की कोई विधि नहीं खोजी गई है जिसका नाम "मानसिक कचरा" है I मज़े की बात ये है कि ये हाइड्रोजन एवं एटम बम से भी ज़्यादा विकिरण छोड़ जाता है जिसके प्रभाव को कई सदियों मे भी नहीं मिटाया जा सकता है. थोड़े शब्दो मे कहा जाए ...