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Showing posts from June, 2020

Support our Indian Army: ONE COIN MISSION DRIVE

Support our Indian Army ONE COIN MISSION DRIVE (जय जवान जय हिंदुस्तान) As all Indian Knows we SAFE Org. are launching our ONE COIN MISSION DRIVE will going to run from 01/Jul/20 to 14th Aug 20, Our Mission for the families of the martyred soldiers will be supported for the protection of the martyrs on the Indo-China border, we request all 135 crore Indians to give a grant of only Rs 1/- Follow the duty of being and ensure that all India stands with the Indian Army. This will be a true tribute to all of you Indians and will also help the families of all those martyrs, as well as the campaign of Boycott China, which can also be made effective. Whatever amount of donation will come, it will be handed over in equal parts to the families of those soldiers through checks and the remaining amount will be deposited in the Martyrs Welfare Fund of the Indian Army. The information of which was given to you through social media. Will all the Indians support us in this mission for all those In...

CH-24: ONE COIN MISSION DRIVE-Vote For Indian Army

Vote for Indian Army ONE COIN MISSION DRIVE SAFE Organisation- Want suggestion from all Indians T he suggestion is as follows: - SAFE Org. ONE COIN MISSION DRIVE is going to run, in which a few days ago, the families of the martyred soldiers will be supported for the protection of the martyrs on the Indo-China border, we request all 135 crore Indians to give a grant of only Rs 1 / - Follow the duty of being and ensure that all India stands with the Indian Army. This will be a true tribute to all of you Indians and will also help the families of all those martyrs, as well as the campaign of Boycott China, which can also be made effective. Whatever amount of donation will come, it will be handed over in equal parts to the families of those soldiers through checks and the remaining amount will be deposited in the Martyrs Welfare Fund of the Indian Army. The information of which was given to you through social media. Will all the Indians support us in this mission for all those Indian s...

CH-31: राजनीति या कूटनीति

राजनीति या कूटनीति ये राजनीति शब्द भी समझ का ही खेल है इसका सीधा सा अर्थ है राजाओ की नीति जो प्रजा के हित के लिए हुआ करती थी जिसे हम राजा संबोधित करते आए है, तब और अब मे फर्क क्या आया तो इसे समझना होगा भारत के आवाम को, पहले राजाओं की नीति हुआ करती थी और अब चोरों /बेईमानों /जुमलेबाज़ो /भ्रष्ट विचारधारा वालों /रूढ़वादी मानसिकता वालों की चोरनितिय समाज में फैल गई हैं, और इनको पाल पोष कर बड़ा हम और आप लोगो ने ही किया है, ये लोग समाज का वो वो सढ़ा हुआ हिस्सा हैं जो सिर्फ़ मानसिक /आर्थिक /राजनीतिक /सामाजिक /व्याहारिक /हिंषात् ‍ मक तौर पर हमे कमजोर करने का षड्यंत्र रचते है, इन लोगो का कोई इमान धर्म नहीं होता, और ये भारत की आवाम इनके बहकावे में इतनी आसानी से आ जाती हैं देख कर ऐसा लगता है ये देश पढ़े लिखे जाहिलो से भरा हुआ है l और उससे भी बड़े वो मूर्ख है जो खुद को इंसान की औलाद बताते है समाज मे घूम घूम कर और उनके काम किसी शैतान से कम नहीं,मानो लगता है खुद की पैदाइश पर भी उनको शक है कि वो इंसान है या शैतान, पर इंसानी रूपी समाज में रहते हुए खुद को भूले से इंसान की औलाद बोल दिया करते हैं, अगर सच ...

CH-30: Concept of Reservation

Concept of Reservation- आरक्षण मिटाओ देश बचाओ आज कल ये नारा चिल्ला चिल्ला के गली गली - मोहल्ला मोहल्ला सुनाई दे रहा है तो लो भाई आरक्षण मिटाने का अचूक नुस्खा - आरक्षण खत्म करना चाहते हैं या आर्थिक आधार पर जारी रखना चाहते हैं तो बहुत साधारण तरीके से हो सकता है भाई...... आरक्षण का लाभ लेकर जितने दलित बेहतर सामाजिक स्थिति में आ चुके हैं उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराकर उन्हें ब्राह्मण जाति दे दीजिए .. वे आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाऐंगे ! फिर उतनी ही संख्या में गरीब बामन बनिये जो भी आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं वे भंगी / चमार / मेहतर जैसी जो जाति का लाभ लेना चाहते हैं वे उस जाति के दलितों में अपनी बेटी बेटे की शादी कर उनके साथ खाना खाएं / उनके साथ रोटी बेटी का रिश्ता कर दलित हो जाएं और आरक्षण का लाभ ले लें .. ये हर साल हो .. होनी चाहिए .. कोई आरक्षण चाहता है तो आजादी के इतने सालों बाद भी जारी जातिप्रथा का दंश भी तो झेले .. जिससे आर्थिक आधार पर आरक्षण छीना जाने की वकालत हो रही है उसे सामान्य जाति का बामन बनिया होने का हक भी तो दीजिए क्योंकि आरक्षण से बाहर होने के बाद तो वो सामान्य जाति का हो...

CH-29: Death Is Getting Cheaper

मौत सस्ती होती जा रही है Death Is Getting Cheaper "जीवन का नैतिक मूल्य इसमें ही है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार के नाकाम रहने पर सवाल पूछा जाए" 20 नवंबर को राजस्थान के अलवर में ट्रेन के आगे छलांग लगाकर तीन नौजवानों का खुदकुशी करना हाल में भारत में हुई ऐसे मौतों की एक भयावह कड़ी है. नैतिकता के लिहाज से देखें तो भारत के लोगों को मौत के विचार को नए सिरे से देखना होगा. इस पर विचार करना होगा कि लंबा जीवन जरूरी है या फिर किसी अच्छे मकसद से कम समय का जीवन ज्यादा अच्छा है. किसी की जिंदगी को तब ही मकसद मिलता है जब वह अपने काम को रचनात्मक दायरे में ले जाए. इसके लिए अनुकूल अवसरों की जरूरत होती है. ताकि सही ढंग से मानसिक और शारीरिक क्षमताओं का विकास हो सके. इससे अपनी अहमियत समझने की क्षमता विकसित होती है. यह क्षमता तब बेहद कम हो जाती है जब व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों से घिर जाए. युवाओं को इस समस्या का सामना अधिक करना पड़ रहा है. क्योंकि उनकी आकांक्षाएं अधिक होती हैं. उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ते जा रहा है और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को ही भविष्य सुरक्षित करने का एकमात्र माध्यम माना जा रहा ह...

CH-28: "एक अनुभव" HIDDEN PHASE OF SOCIAL MEDIA

"एक अनुभव" एक समय था जब लोगो के पास डिजिटल ग्रुप सिस्टम नहीं था फिर भी कोसो मील दूर रह कर भी लोग एक दूसरे के लिए तत्पर रहा करते थे और बिना किसी स्वार्थ के और आज का तो ये बुरा हाल है कि ग्रुप में टाइम पास करना एक कल्चर सा बन गया है, किसी बकवास मुद्दे पर उल्टे सीधे कमेंट तक ही लोगो का दिमाग चोक हो चुका है, ऐसी मानसिक गुलामी से शिकार बन चुके हैं जिससे उबर पाना नामुमकिन ही है अब तो, पहले लोगो का रिश्ता इस बुनियाद पर हुआ करता था कि मै किसी के सुख मे रहू ना रहू पर यदि दुःख मे साथ खड़ा होने का अवसर मिले तो जीवन मे कुछ सन्तोषजनक किया ऐसा खुद को महसूस हो, पर आज के दौर में रिश्ता उसी दिन से कमजोर होने लगता है जिस दिन आपके सहयोगी ने आपसे कुछ सहयोग मांग लिया फिर क्या तुरंत जी चुराना, कन्नी काटने का प्रचालन सुरू होने लगता है, अक्सर सुना होगा ये कहते लोगो से की मै तुम्हारे साथ हमेशा खड़ा हूँ परंतु जब आप कभी गलती से साथ मांग भर ले तो आपको खुद ही मालूम है क्या जवाब आएगा उसे बताने की जरूरत नहीं I अब क्या हम वाकई में सच्चे इंसान या दोस्त होने का दावा करते हैं, वो कितने हद तक सार्थक दावेदारी ...

CH-27: क्यों डरा है ?

"क्यों डरा है ? " क्यों डरा है देश का बहुत बड़ा हिस्सा जो सदियों से पीड़ित, डरा हुआ और सहमा हुआ है आखिर ऐसा क्यों है ? इस बात को समझना बहुत ही जरुरी है , देश का बहुत बड़ा हिस्सा मध्यम वर्गीय है ,इनके डर का सबसे बड़ा कारण है इनका समाज का हिस्सा होते हुए भी अकेला होना ,सिर्फ बातो में संयुक्त रूप से नज़र आते है पर जिमिनी स्तर पर ये बिलकुल अकेला और तनहा होता है I ऐसा तबका जो आतंरिक रूप से अकेला होने के साथ-साथ पारिवारिक रूप से भी सहयोग नहीं प्राप्त कर पता I ऐसा कोई स्तर नहीं है जहाँ ये डरता न हो और हो भी क्यों ना इनके पीछे कोई इनको सँभालने वाला भी तो नहीं होता, बस गिरने का जो डर है पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहता है जो सिलसिला थमने का नाम तक नहीं लेता I इन हजारों लोगो में गलती से मुट्ठी भर हिम्मत दिखाता भी है तो किसी न किसी रूप में दबा दिया जाता है जो बिलकुल परंपरागत व्यवस्था है I पैदा होने से मरने तक का हर डर उनको ना चैन से जीने देता है और ना ही मरने देता है I ये तबका आखिर करे भी तो क्या करे, इनकी ज़िन्दगी हमेशा किसी न किसी के आधीन ही रहती है, और तो और इन लोगो की ऐसी मानसिकता भी विकशित...

CH-26: स्त्री देह इस दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है।

स्त्री देह इस दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है। स्त्री देह भी एक सामान्य देह है, जैसे पुरुष की| न जाने क्यों स्त्रियों की देह को कुछ अजूबा-सा मान लिया गया| जहां पुरुषों को अपनी जैविक संरचना पर गर्व की अनुभूति हुई, वहीं स्त्री को शर्म की| पुरुष अपने खुद को स्त्री से उच्च मानने लगा| स्त्रियाँ बचपन से ही अपनी देह को छुपाने का उपक्रम करने लगीं, वहीं पुरुष बेहद धृष्टता से उसे उजागर करने का| स्त्री की शर्म और संकोच पर पुरुष ने अपने गर्व का शिकंजा कसा, उसकी शर्म को तार-तार करना सबसे बड़ा कर्म है| पहले उस पर शर्म के, हया के बंधन, फिर शारीरिक अक्षमता का बहाना करके उसकी सुरक्षा का ठेका अपने नाम करने की साजिश| पिता, भाई, पति, पुत्र सब स्त्रियों के रक्षक बनें| रक्षक भी पुरुष और शिकारी भी पुरुष यानी एक पुरुष दूसरे पुरुष से बचाने के लिए आगे आया, वरना स्त्रियों से तो कोई खतरा था ही नहीं| वह खतरा बाद में पैदा हुआ जिसे पितृसत्ता ने ही पैदा किया,फिर एक पुरुष को जब दूसरे पुरुष से बदला लेना हुआ, आक्रोश व्यक्त करना हुआ तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनीं वो स्त्रियाँ जो उस पुरुष के अधीन थीं| यहां भी स्त्री देह ही निश...

CH-25: यहां पिता ही अपनी बेटी के लिए लाता है ग्राहक !

यहां पिता ही अपनी बेटी के लिए लाता है ग्राहक ! कहने को तो महिलाओं की स्थिती मज़बूत हुई है, वो शसक्त बनी हैं लेकिन इसी बात का हम दूसरा पहलू देखें तो महिलाओं की हालत पहले से भी ज्यादा बदतर हो गई है। भारत में आज भी कई राज्यों में जिस्म का धंधा सरेआम होता है, घर की बेटियां इस धंधे में धकेली जाती हैं और इन्हें धकलने वाले और कोई नहीं बल्कि इनके ही परिवार वाले हैं। पूरे भारत की बात छोड़ अगर हम अकेले मध्यप्रदेश की ही बात करें तो मध्यप्रदेश के मालवा के नीमच, मन्दसौर और रतलाम ज़िले में कई गांव ऐसे हैं, जहां अगर बेटी किसी मर्द के साथ सेक्स करती है, तो भी मां बाप को इससे कोई ऐतराज नहीं होता। बल्कि बेटी के जिस्म के प्रति लोगों की जितनी दीवानगी बढ़ती है उतना ही उनकी खुशियों का दायरा भी बढ़ने लगता है ...क्योंकि कमाई भी तो उतनी ही ज्यादा होगी। हमारे सभ्य समाज के लोगों को वेश्यावृति के बारे में बात करने में शर्म आती है क्योंकि इसे वो सही नहीं मानते, घिनौना काम मानते हैं, लेकिन ये ही लोग दिन के उजाले से निकलते ही रात के अंधियारे में इन इलाकों की ख़ाक छानना शुरू कर देते हैं। ये बात भले ही आम लोगों के लिए...

CH-23: MODERN MENTALITY

"आधुनिक सोच" ( MODERN MENTALITY ) हम हिंदुस्तान के 95% आबादी हमेशा अधूरा ही काम करते आए है, जिसे हम कई स्तर पर देख सकते हैं, उदहारण के तौर पर : modernization को घोल कर पी तो गए है पिछले दो दशकों में पर हज़म आज तक नहीं कर सके है और शायद कभी कर भी नहीं सकते, क्योंकि हमारा स्वभाव कौए जैसी जो बन गई हैं, हम सिर्फ़ बोलने में और किसी की ना सुनने और समझने में ही भरोसा करते आए हैं, हम शारीरिक मॉडर्न तो बन गए परंतु मानसिक तौर पर आज भी चिंन्दी चोर ही बने हुए है, हम पश्चात संस्कृति की कुछ नकल करके खुद को मॉडर्न समझने की भूल कर बैठते है, हम आज भी कपड़ो, गाड़ी, घर, या अन्य भौतिक चीज़ों को बाखूबी खुद मे आत्मसात कर चुके हो पर पश्चात संस्कृति की सोच विकसित नहीं कर पाए है, अन्य विकशित देश जात, धर्म, भेद, ऊंच नीच से बहुत परे हो चुके हैं, और उनकी कामयाबी का सबसे बड़ा राज़ भी यही है, हम अंग्रेज़ी तो बोलते जरूर है पर खुद को civilized साबित करने के लिए पर क्या उनके देश में ऐसा होता है मेरे हिसाब से तो नहीं, तो बताए कहा से मॉडर्न हुए हुए हम, वो हमे कॉपी कभी नहीं करते अगर करते भी होंगे तो बस यहा कि...

CH-22: हमें कब मिलेगी आज़ादी

#"हमें कब मिलेगी आज़ादी" हिं दुस्तान के युवा की हालत बद से बद्दतर होती जा रही है 20000 Rs से 25000 Rs तक की नौकरी या भीख के लिए तरस रहे है I क्या यही देश का विकाश है ,देश के युवा बहुत काबिल और बुद्धिजीवी है परन्तु private, govertments और coorporates sectors ने मिल कर इनको गुलाम बनने पर मजबूर कर दिया है और गुलामी इनकी ख़ुशी नहीं बेबसी को साफ-साफ दर्शाता है, पर इसका कोई तो इलाज होगा ही , देश के लोगो को क्या लगता है व्यसाय में निजीकरण हो जाने से देश के युवाओं का उद्धार होने वाला है तो भूल जाये ऐसा कोई चमत्कार नहीं होने वाला ,जब तक निष्पक्षता और उदारीकरण की निति का आगाज़ नहीं होगा वो भी मानवता आधारित तब तक कुछ भी बेहतर नहीं हो सकता है I हमारी सरकारे अब सरकारी नौकरीयों का भी निजीकरण करती जा रही है ये क्या वो नारा भूल चुके है जो हमेशा से चिल्लाते आयें है की "समावेशी उन्मुख विकाश" ही असली देश का और देश के लोगो का विकाश है, कहा गया वो भ्रान्ति फ़ैलाने वाले दोगले लोगो जिन्होंने देश के युवाओं को गर्त में जाने को मजबूर किया है I भारत के मूल को भी न जाने क्यों लगता है की कोई मसीहा...

CH-21: एक राहगीर का पत्र

एक राहगीर का पत्र जि स मानसिक कलह से गुजारता हूँ मै रोज, पिछले कई सालो से आज वो पूर्ण रूप से मानसिक नासूर बन गया है, जैसे-जैसे मन में किसी अपने के प्रति इज़्ज़त का भाव घटने लगता है तो समझ लो उसकी मौजूदगी चंद दिनो की ही रहेगी I आपके जीवन मे, यूँ तो देखा जाए आप कातिल खुद ही है अपनों के, पर उसका कोई सबुत नहीं, नहीं कोई गवाह होता है, कत्ल करने वाला खुद को बदकिस्मत कहता है पर असल मे गुनहगार वो खुद होता है, मेरा भी कत्ल कई बार हुआ, बस जलाना और दफनाना ही शेष रह गया, ये तो बिलकुल सच है जो दिखता है वो ही बिकता है, आर्थिक अभाव ने झूठा, बदकिस्मत, बेकार, भीखारी, धोखेबाज़, नालायक, गिरा हुआ हुआ और ना जाने किन-किन नामों से नवाजा जाता रहा हूँ मैं, दो ही रास्ते बचते है या तो हार मान लू या परिस्थितियों का सामना करू, हारु या जीतू दोनों ही हालत मे मरना मुझे ही होगा, ये तो अपनी-अपनी समझ हैं, पर मुझे अफसोस नहीं है मेरा ये हाल है मुझे तो अफसोस इस बात है कि मेरे ना होने के बाद तेरा क्या हाल होगा, हो सके मेरे ना होने के बाद सब कुछ तेरे नसीब मे होगा पर क्या तुम सच में मुझे भूला पाओगे, कम से तेरे मरने से पहले तो...

CH-20: कोई दिखता क्यों नहीं

" कोई दिखता क्यों नहीं " कोई दिखता क्यों नहीं जो दूर तक साथ जाए कोई मिलता क्यों नहीं जो मुझे खुद से दूर ना करे कोई रहता क्यों नहीं जिसके होने से किसी की चाहत बाकी ना रहे कोई मुझे मुझ जैसा मिला क्यों नहीं जो भी मिला अपना ही बनना चाहा मेरा बनने को तैयार कोई नहीं कोई मेरा अपना भी होगा कभी, ये सोच कर सबका बनता चला गया पर मेरा कोई बन ना सका, सब समझने लगा था फिर भी चुप रहने लगा था खुद से पूछा कि क्या वजूद है मेरा, देखा कहीं मेरा कोई अस्तित्व नहीं, बस लोगों की जुबान तक सीमित ही रहा, दिल तक का रास्ता मिला नहीं, तलाश जारी रही, जद्दोजहद बाकी रही....... लेखक : Er.Ram Singh Mob.no : 09768836002

CH-19: आत्महत्या (SUICIDE)

आत्महत्या (#SUICIDE) आ त्महत्या आज पूरी दुनिया में एक बड़ी समस्या बन चुका है, आंकडे के हिसाब से पूरी दुनिया में लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या वार्षिक दर से कर रहे है जिसमे से सबसे ज्यादा भारत में लगभग 1.5 लाख लोग औसत दर से आत्महत्या कर रहे है , आत्महत्या एक बड़े अपराध से कम नहीं है और वाकई में खुद की जानलेना कोई आसन कम नहीं है ये अवस्था तभी आती है जब इन्सान का दिल और दिमाग पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाता है कुछ बाहरी और आतंरिक करणों की वजह से I  हम पूरी दुनिया की नहीं भारत की बात करेंगे जिसमे कुछ गंभीर समस्याएँ है, जिसपर हम बात करेंगे I  जिसे हम दरकिनार कर देते है जिन कारणों से 15 - 39 उम्र तक के स्त्री एवं पुरुष आत्हत्या कर रहे है, अगर इसपर काबू नहीं किया गया तो हर घर के चार सदस्यों में से एक आत्महत्या से अपनी जान ले लेगा और हर घर की कहानी में एक मौत आत्हत्या की जरुर होगी I   भारत में आत्हत्या के दो प्रमुख कारण है जिसमे शिक्षा के क्षेत्र में फेलियर होना  और स्त्री-पुरुष के आपसी संबंधो को लेकर अन्य बहुत कारण है पर ये सबसे मुख्य कारण है जिसका हम पूर्ण र...