#आश्रम#
#OLD-AGE HOME
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अक्सर ऐसा देखा गया है कि शादी के बाद ही वृध्दा आश्रम की जरूरत माँ-बाप को होती होती हैं, शादी के पहले माता-पिता आश्रम क्यों नहीं जाते, दूसरा ये भी देखा गया है की लड़के के माता-पिता को आश्रम जाना होता है, लड़की के माता-पिता को आश्रम जाते हुए नहीं देखा जाता, ये तब होता है जब लड़की के भाई की शादी हो जाए, तो वहां भी यही दृश्य नज़र आता है, जब तक शादी ना हो तब तक इसकी जरूरत क्यों नहीं पड़ती, देखा जाए तो लड़का अगर गलत होता तो ये काम शादी के पहले क्यों नहीं करता, इसका मतलब कुछ तो निकलता है और ये सोचने वाली बात है की समस्या शादी में है, लड़के मे है या फिर नए सदस्य के जुड़ने में है...... संस्कार भंडार तो सब लेके ही रिस्ता बनाते है फिर ऐसा कौन सा मंत्र छू जाता है कि सब कुछ अचानक बदल जाता है...... हम सभी लोगो को इसपर विचार करने की जरूरत है, यूरोप में child orphan system जो आज भी बहुत तेजी से चल रहा पर child को कोई ना कोई आ ही जाता है गोद ले ही लेता है I
अब आइए भारत जो अपने संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है यहा seniors citizens /old age orphan system पिछले कुछ ही दशक से जारी हुआ पर इनको कोई गोद भी लेने नहीं जाता, इसका मतलब तो यही हुआ कि आदमी खतम तो काम खतम....... कुछ तो गहरा है इसमे छिपा, और ये भी देखा गया जब तक शादी ना हो तो लड़के के माता-पिता लड़की के लिए मॉम-डैड so-called सोसाइटी में होते हैं, जैसे ही शादी हुई सब कहा उड़ जाता है...... ये भी सोचने वाला मुद्दा है,.... ये कैसी भारतीया आधुनिक संस्कृति है इससे अच्छा तो यूरोप ही है ना जहां कम से कम सीने से लगाने वाला कोई तो मिल ही जाता है, परंतु भारत में कोई हाल तक उनका नहीं पूछने जाता जो वृद्ध आश्रम में घर से उठा कर फेक दिए जाते हैं, शुक्र है भारत में गाँव है वर्ना 60 के बाद डबल रिटायरमेंट मिला करती, ये प्रचलन मेट्रो सिटी में ही खुद शायद सामाजिक स्तर ऊंचा उठाने के किया जाता होगा, थोड़ी सी मुझमे नादानी है इस लिए ये लेख लिख दिया क्योकि मै रहता मेट्रो सिटी में ही हूँ पर गाँव का गवांर ही हूँ शायद, तो यहा कि हवा मुझे बीमार कर देती हैं पर ऐसी स्वस्थ हवा का क्या किया जाए जो अपने वजूद को आश्रम की शान बना दिया करते है जबकि जिसकी सही जगह घर में है........
*त्रुटि के लिए माफी चाहूंगा ये लेख किसी विशेष व्यक्ति से कोई संबंध नहीं रखता अगर रखता भी है तो मात्र ये एक संयोग कहा जाएगा....*
लेखक
Er. RAM SINGH

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