" कोई दिखता क्यों नहीं "
कोई दिखता क्यों नहीं जो दूर तक साथ जाए
कोई मिलता क्यों नहीं जो मुझे खुद से दूर ना करे
कोई रहता क्यों नहीं जिसके होने से किसी की चाहत बाकी ना रहे
कोई मुझे मुझ जैसा मिला क्यों नहीं
जो भी मिला अपना ही बनना चाहा मेरा बनने को तैयार कोई नहीं
कोई मेरा अपना भी होगा कभी, ये सोच कर सबका बनता चला गया
पर मेरा कोई बन ना सका, सब समझने लगा था फिर भी चुप रहने लगा था
खुद से पूछा कि क्या वजूद है मेरा, देखा कहीं मेरा कोई अस्तित्व नहीं,
बस लोगों की जुबान तक सीमित ही रहा, दिल तक का रास्ता मिला नहीं,
तलाश जारी रही, जद्दोजहद बाकी रही.......
लेखक :
Er.Ram Singh
Mob.no : 09768836002
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