आत्महत्या (#SUICIDE)
आत्महत्या आज पूरी दुनिया में एक बड़ी समस्या बन चुका है, आंकडे के हिसाब से पूरी दुनिया में लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या वार्षिक दर से कर रहे है जिसमे से सबसे ज्यादा भारत में लगभग 1.5 लाख लोग औसत दर से आत्महत्या कर रहे है , आत्महत्या एक बड़े अपराध से कम नहीं है और वाकई में खुद की जानलेना कोई आसन कम नहीं है ये अवस्था तभी आती है जब इन्सान का दिल और दिमाग पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाता है कुछ बाहरी और आतंरिक करणों की वजह से I
हम पूरी दुनिया की नहीं भारत की बात करेंगे जिसमे कुछ गंभीर समस्याएँ है, जिसपर हम बात करेंगे I जिसे हम दरकिनार कर देते है जिन कारणों से 15 - 39 उम्र तक के स्त्री एवं पुरुष आत्हत्या कर रहे है, अगर इसपर काबू नहीं किया गया तो हर घर के चार सदस्यों में से एक आत्महत्या से अपनी जान ले लेगा और हर घर की कहानी में एक मौत आत्हत्या की जरुर होगी I
भारत में आत्हत्या के दो प्रमुख कारण है जिसमे शिक्षा के क्षेत्र में फेलियर होना और स्त्री-पुरुष के आपसी संबंधो को लेकर अन्य बहुत कारण है पर ये सबसे मुख्य कारण है जिसका हम पूर्ण रूप से विस्तार करेंगे :
सामाजिक दबाव : अक्सर ऐसा देखा गया है चाहे शहर हो य गाँव बच्चो की पढाई को लेकर बहुत सारी समस्याएँ सामने उभर कर आतीं है , माता पिता का दबाव तो बचपन से ही रहता है पढाई को लेकर और रहना भी चाहिए पर कितना रहना चाहिए ये बात माता पिता अक्सर जाने-अनजाने में भूल जाते है और उनको लगता है जो वो कर रहे है ठीक कर रहे है, पर इसका अंदाज़ा तब लगता है जब वही बच्चा किशोरावस्था के पड़ाव पर पैर रखता है, माता-पिता का पढाई को लेकर इतना दबाव बन जाता है की उनके हिसाब से मार्क अगर नहीं ला सका तो न जाने कौन सा पहाड़ टूट जता है, समाज में मुह दिखाने के लायक नहीं रहते और न जाने क्या-क्या अवधारणा पल कर बैठ जाते है I फेल होने का डर बच्चे को इतना डरा देता है की आत्महत्या करने पर मजबूर कर देता है, गलती उस बच्चे की नहीं ये सामाजिक संरचना ऐसी ही बनी हुई है की बचने का कोई रास्ता ही नहीं है यदि एकाद इस सामाजिक दायरे को पार भी करने की कोशिश करे तो यही समाज उसे बागी बना देता है I
क्या समाज में जीने के लिए अच्छे मार्क्स लाना जरुरी है, बिना पास हुए या बीनाअच्छे मर्स्क के उन बच्चो को समाज में सर उठा कर जीने का अधिकार नहीं है I इस पर हर माँ-बाप को सोचना होगा I यदि कोई फेल हो भी गया तो के माँ बाप इतने सक्षम नहीं होते की अपने कोख से जन्मे बच्चे को मानसिक सहारा दे सके ताकि उसे आत्हत्या न करनी पड़े I आत्महत्या एक अपराध जरुर है कानून की नज़र में, पर इस हालात तक एक बच्चे को पहुँचाने वाले उनके आसपास के लोग ही है , क्यों उसे इतना डरा दिया जाता है की उसे मरने के अलवा कोई और रास्ता नहीं दिखता, तो इसपर कम करने की जरुरत है, हमें और आपको और पुरे समाज को , नहीं कर सकते तो छोड़ दें अपने बच्चो को सूली पर लटकने के लिए ?
आर्थिक दबाव : आर्थिक दवाव भी बहुत बड़ी समस्या है आज के दौर में आत्महत्या से जुडी घटनाओ को लेकर, गृहस्थ जीवन में पर्याप्त संसाधन न होना के कारण पारीवारिक क्लेश उत्तपन होता रहता है, जो अपने आप में एक गंभीर समस्या है जिसकी वजह से इन्सान की सुध-बुध काम करना बंद कर देती है, हर इन्सान सभी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता जिसे स्वीकारना ही होगा, कुछ न कुछ कमियां बाकि रह ही जाती है I जहाँ ये स्वीकार्यता स्तर घटता है वही से समस्या उत्त्पन्न होना शुरू हो जाती है , एक पुरुष के लिए सब कुछ अकेले कर पाना संभव नहीं अपवाद को छोड़ कर , जिस पारिस्थिती में घर के बहार जाकर काम करता है फिर शाम को घर आते है पत्नी का लड़ना-झगड़ना और दुनिया भर की समस्याओं को लेकर उलझे रहना कही न कहीं बहुत असहनीय मानसिक पीड़ा से गुज़रता होगा, बहार काम करने वाला चाहे पुरुष हो या महिला , ऐसी पारिस्थि में उसे थोड़े प्यार और सहानभूति की जरुरत होती है, पर इस बात को लोग नज़रंदाज़ कर देते है और रोज़ की परवारिक क्लेश उसे आत्महत्या करने को बाध्य कर देती है, आत्हत्या करना समाधान नहीं पर जब एक इन्सान को इस बात का एह्साह करा दिया जाये की तुम्हारी कोई वैल्यू नहीं मेरी लाइफ में, तुम्हारे रहने ना रहने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है और तुम किसी काम के नहीं, जीवन में कुछ कर नहीं सकते, इत्यादी इस तरह की दिल को चुभने वाली बातें उसे पूरी तरह से तोड़ देती है, उसका अकेलपन-खालीपन उसे ऐसा बना देता है की जीने की इच्छा पूरी तरह मर जाती है और जिस इन्सांन की जीने की इच्छा मर चुकी हो उस इन्सान को मरने में देर नहीं लगती I
स्त्री पुरुष के बिच संबंध : आज का युवा पीढ़ी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते है किसी साथी की तलाश में जुट जाता है चाहे वो किसी रूप में हो ,बस रिश्ता बन ही जाता है प्रेम का , अब प्रेम का रिश्ता बनते ही वर्चस्व की भावना स्वत: ही लड़के और लड़की के बिच आने लगती है , दोनों के बिच प्रेम संबंध बनने लगते है , एक सत्य है जिसे नाकारा नहीं जा सकता जो जितनी जल्दी बनता है वो उतनी जल्दी बिगड़ता भी है , आज के दौर में कोई भी रिलेशनशिप इन्सान की quality के आधा पर नहीं उसके पास Assets कितनी Quantity में है उसपर बनने लगे है , जैसे-जैसे Assets की Quantity घटने लगती है प्रेम के Quality में भी गिरावट दिखने लगती है , एक समय ऐसा आता है जब प्रेम पूरी तरह से हवा हो जाता है तब उस स्थिति में सब कुछ बिखरा-बिखरा सा लगता है और जीने की उम्मीद खत्म हो जाती है और मानसिक स्थिति बिलकुल नकारा बन जाती है फिर आत्महत्या करने के अलावा कुछ सूझता नहीं है इन लड़के-लड़कियों को ?
कुछ अन्य समस्याएँ जिसपर धयान दिलाना जरुरी समझता हूँ :
1. साथ-साथ यह भी देखा गया है extramarital अफेयर भी ट्रेंड में चल रहा है जिसका खुलाशा भी आत्महत्या की और लेकर जाता है
2. कर्ज में डूबा हुआ इंसान
3. स्कूल की फीस न भर पाना
4. बिज़नस में नुकसान होना
5 . LOVE SEX और DHOKHA जैसी स्थिति
6. किसान आत्महत्या
7. नाकामयाबी बार बार हाथ लगना
अन्य बहुत सारी समस्याएँ है जिसका उपचार भी बहुत ही सटीक और कारगर भी है जिसका उल्लेख अगले प्रकाशन में किय जाएगा ....
लेखक :
ई. राम सिंह

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