हिंदुस्तान के युवा की हालत बद से बद्दतर होती जा रही है 20000 Rs से 25000 Rs तक की नौकरी या भीख के लिए तरस रहे है I क्या यही देश का विकाश है ,देश के युवा बहुत काबिल और बुद्धिजीवी है परन्तु private, govertments और coorporates sectors ने मिल कर इनको गुलाम बनने पर मजबूर कर दिया है और गुलामी इनकी ख़ुशी नहीं बेबसी को साफ-साफ दर्शाता है, पर इसका कोई तो इलाज होगा ही , देश के लोगो को क्या लगता है व्यसाय में निजीकरण हो जाने से देश के युवाओं का उद्धार होने वाला है तो भूल जाये ऐसा कोई चमत्कार नहीं होने वाला ,जब तक निष्पक्षता और उदारीकरण की निति का आगाज़ नहीं होगा वो भी मानवता आधारित तब तक कुछ भी बेहतर नहीं हो सकता है I हमारी सरकारे अब सरकारी नौकरीयों का भी निजीकरण करती जा रही है ये क्या वो नारा भूल चुके है जो हमेशा से चिल्लाते आयें है की "समावेशी उन्मुख विकाश" ही असली देश का और देश के लोगो का विकाश है, कहा गया वो भ्रान्ति फ़ैलाने वाले दोगले लोगो जिन्होंने देश के युवाओं को गर्त में जाने को मजबूर किया है I
भारत के मूल को भी न जाने क्यों लगता है की कोई मसीहा आएगा और उनके दुखो को चुटकी बजा के दूर कर देगा , इसका बस एक ही उपचार है -जब तक शिक्षा को नोट कमाने का माध्यम समझा जाएगा तब तक ये गुलामी वाली मानसिकता से आज़ादी नहीं मिलने वाली ,ये देश कभी आजाद हुआ ही नहीं तो जश्न किस बात का, मानव का विकाश ही असली देश का विकास है न की देश का विकास मानव के विकाश को इंगित करता है I
आज मै दावे के साथ ये बोल सकता हुआ मानव का विकाश तभी संभव है जब सबकी बराबरी होगी और सबकी बराबरी तभी संभव है जिब "उम्मीद" का दामन छोड़ दिया जाये और खुद को इतना शशक्त बनाया जाये की किसी के आने और जाने से उनको कोई फर्क न पड़े I जमींन पर रहने वालों को जमीं पर ही छोड़ दिया जाये और मानव को सिर्फ मानव का दर्जा दिया जाये I जमीनी भगवन को दरकिनार कर ही दर्जा प्राप्त होगा I
आज़ादी को आज़ादी तभी कहा जाएगा जब वाकई में हर व्यक्ति की आम जरूरते पूरी करने के लिए न जान लेना पड़े न ही खुद की जान देना पड़े तभी खुद आप आप आज़ाद महसूस कर पाएंगे I
क्या कोई अपने ही घर को लुटता है ? शायद नहीं फिर भी ये लोग देश को अन्दर से खोखला क्यों कर रहे है ? किसी भी घर या देश को बर्बाद करना हो तो वहां के युवाओं को गुमराह कर दो देश हो या घर हो उसका विनाश होंना तय है ,और यही हो भी रहा है I कई दशकों से अब यह चरम सीमा तक आ चूका है और एक भयंकर गृह क्रांति का आगाज़ होने वाला है ,जिसका परिणाम बहुत ही भयंकर हो सकता है जिसके भुक्तिभोगी हम सब होंगे I
यह लेख सिर्फ भुत, वर्त्तमान और भविष्य के हालत को दर्शाता है यह किसी व्यक्ति विशेष से कोई संबंध नहीं रखता है न ही देश के लोगो में विरोधाभाष पैदा करता है ,बस इसका सीधा सम्बन्ध आने वाली परिस्थितियों को दर्शाता है I जिसका मिल कल समाधान ढूँढना होगा I
लेखक :
ई.राम सिंह

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