पिछ्ले लेख मे विकल्पों का कुछ बारीक विवरण दिया गया था, उन्ही मे छिपा एक है छोटा पहलू परंतु पूरे विधि के विधान को बदल सकता है, अगर किसी विकल्प की खोज एक सकारात्मक सोच के साथ की जाए तो वो संकल्प मे परिवर्तित हो जाया करती हैं, ऐसे बहुत ऐतिहासिक उदहारण भरे है जिसकी गिनती की जाए तो एक ग्रंथ की रचना की जा सकती है, संकल्प एक आन्तरिक गतिविधियों का नतीज़ा है जो सिर्फ़ और सिर्फ़ किसी खास कराणों से ही जन्म लेता है-एक विचार के रूप में, इसका जन्म बिल्कुल इंसानो की तरह ही होता है, कई करोड़ो गतिविधियों में टकराव के बाद ही एक शक्तिशाली विचार संकल्प बनकर कायाकल्पित होता है, और ये संकल्प का आपके सकारात्मक विकल्पों के कारण ही जन्म लेने को बाध्य होता है.
इसका जन्म एक सामाजिक, मजबूत और दूरदर्शी होने का प्रमाण सिद्ध करता है, जो एक बेहतर, विवेकशील इंसान को तैयार करता है, जो कभी मरता नहीं बस जिस्म का नाश होता है परंतु उसका संकल्प युगों युगों तक प्रेरणा बनकर नए और बेहतर समाज की संरचना करता रहा है और करता भी रहेगा l
हम हमेशा से सुनते आए है कमल कीचड़ मे खिलता है ये सार्वभौमिक सत्य है, विकल्प एक कीचड़ की तरह हो सकता है परंतु उसने से जन्मा संकल्प अमूमन कमल ही होता है, क्योंकि विकल्प हमेशा आते जाते है परंतु संकल्प काफी ताप के पश्चात ही सृजन होता है l
इसका सार ये है कि विकल्पों की अधिकता भले क्यों ना हो जीवन में जब तक संकल्प मे परिवर्तित नहीं होगा मानव जाति का उद्धार होना असंभव है!
क्या अपको इसपर विचार नहीं करना चाहिए कि हमे विकल्पों और संकल्पों के इस घमासान युद्ध मे किसके साथ चलना चाहिए कि ?
जिस दिन इस सवाल का सटीक उत्तर अपको मिल गया समझो आप है आने वाले सुनहरे भविष्य के सृजनकर्ता हैं......
धन्यवाद
लेखक :
Er.RAM SINGH

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