आज पूरा हिंदुस्तान हर लम्हा सिर्फ विकल्प खोज रहा है, जन्म से मृत्यु तक के सफर में सिर्फ़ और सिर्फ़ विकल्प तलाशता हुआ दिखता है, ये वो अकाट्य सत्य है जिसे कोई चाह कर भी नकार नहीं सकता, है ना बिल्कुल सटीक l नाम से पहचान तक बस इसी जद्दोजहद मे हर कोई लगा है, भौतिकवाद ही परम सत्य हो गया है, इसी भौतिकवाद का सीधा संबंध विकल्प से जुड़ा है, सुई बनाने से लेकर हवाई जहाज तक हर कोई एक दूसरे को मार काट रहा है, कोई तलवार से, कोई छल से, कोई प्रेम से, कोई बम से, कोई हथियार से सिर्फ इसी विकल्प को पाने के लिए.
हमारा जन्म होने से पहले ही ये विकल्प तय कर लिया जाता है अगर लड़का हुआ तो ये होगा और लड़की हुई तो वो होगा, कितना जटिल है जीवन जीना इस तरह के माहौल में, आपके अपने जो दिन रात आपके साथ रहते हैं, व्यक्तिगत से वाणिज्यिक जीवन दोनों मे सिर्फ़ आपनी पहचान एक विकल्प के रूप में ही होती हैं, जहां ऐसा अवसर आया जहाँ से आप किसी के लिए कोई विकल्प सिद्ध ना हुए तो आप उस व्यवस्था से तुरंत बाहर कर दिए जाएँगे और सारे वैकल्पिक लोग मिल करे आपको निष्क्रिय कर देंगे l
जब सारा विकल्प बंद हुआ तो आप कुछ पल सोचते है और आपको दो रास्ते नज़र आते है... पहला या तो डूबने और दूसरा किसी और नए विकल्प की खोज सुरू होती हैं, और मुझे लगता है एक इंसान तभी इंसान बनता है जब विकल्पों पर विजय प्राप्त कर ले, परंतु सवाल ये है किस कीमत पर उनको हासिल किया जाए, या तो दूसरों का विकल्प छीना जाए या खुद का कुछ नया हो, आज का समाज ऐसा है जो दूसरों का जबरन लेना ही प्राथमिकता मे शामिल है.....
आज के दौर में अधिकतर विकल्प ही अपराध का रूप धारण कर चुका है, जो विनाश की ओर बहुत तेजी से अग्रसर हो चुका है.....क्या इसको समझने की जरूरत महसूस नहीं होती है?
Upcoming Blog: SANKALP.......
लेखक :
Er. Ram Singh (President)
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