" भूख और भारत "
एक बच्चे को जोरो से भूख लगी थी ,उसने अपने पिता से खाना माँगा ,गरीबी ,तमाम कर्जो आदि की वजह से घर की माली हालत ठीक नहीं थी , पिता खाना देने में असमर्थ था तो अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए उसने अपने बच्चे को उठा कर अलमारी के ऊपर बिठा दिया और छोड़ दिया, अब बच्चे के मन में गिरने का डर बैठा गया ,तो सहमा डर के मारे बैठा रहा, उसके डर ने भूख से उसका ध्यान हटा दिया,अब वो खाना मांगना बंद कर दिया और पिता से नीचे उतरने का आग्रह करने लगा पर पिता खुद ही डरा हुआ था की नीचे उतारते ही फिर से खाना मांगेगा ,कहीं से पिता रोटी का टुकड़ा ढूंढ कर लाया और नीचे थाली में रख दिया,बच्चे ने देखा और खुश हो गया,पिता ने उसे जैसे ही उतारकर नीचे रखा उसी पल दुसरे हाथ से रोटी का टुकड़ा अलमारी के ऊपर रख दिया ,अब बच्चा और परेशान हो गया और भूख से तड़पने लगा I
इस कहानी का सार:
बस यही हालत आज हमारे भारत का है.....अब तक भारत में बेरोजगारी , भूख, शिक्षा, धर्म,जात-पात का मुद्दा था जो भूख वाली स्थिति को दर्शाता है और अब के तत्कालीन मुद्दे रोटी के टुकड़े वाली स्थिति को दर्शाते है ....आज का युवा अपने भूख मिटने का प्रबंध करे या आपने शिक्षा नागरिकता आदि के अस्तित्वा को बचने की लड़ाई लडे... शायद इस छोटे से लेख से किसी को कुछ समझ आये पर मेरी कोशिश यही है की सच्चाई के आईने में आपना आने वाला कल कैसा होगा आपको ही मिलकर तय करना होगा
आज "पेट" और "वजूद" (अस्तित्व) में भयंकर युद्ध छिडचूका है इसमें से एक भी हरा हो इन्सान नहीं बचेगा और दोनों का विजय एक साथ होना असंभव है, कितनी दैयनीय स्थिति बन गई है इस देश की....जय बुद्ध जय भारत
Er. RAM SINGH (CEO)
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