सोशल मीडिया पर ये nudity का ना जाने क्या concept हैं, ये एक मानसिक बीमारी नहीं तो क्या हैं? ख़ुद को नंगा करके Instagram, Facebook, twitter, WhatsApp, tiktok, likeee, imo आदि और बहुत सारे साइट्स पर, अक्सर इसमे ल़डकियों की तादाद सबसे ज्यादा पाई गई हैं जो अपनी ही nudes pics को अपलोड करती है, ये खुद को कहा ले जाना चाहते हैं, कुछ likes और share और थोड़े बहुत पैसे शायद के चक्कर में ख़ुद के लिए और समाज के लिए क्या योगदान दे रहे हैं, बहुत सारी लड़कियाँ शायद इसे पढ़ कर रूढ़ीवादी मानसिकता का समझने लगे पर आखिर खुद भी सोंचे SOCIAL media आखिर है किस लिए, इसका उद्देश्य क्या हैं, क्या नग्न तस्वीरों और वीडियो से ही उनका दाना पानी चलता है, अरे भाई अच्छे msg, video, article, stories, thoughts, arts आदि से भी तो विख्यात हुआ जा सकता है, क्या आधा sunny Leone ही बनना जरूरी है, अगर यही एक बेहतर विकल्प दिखता है modernization के नाम पर तो कोई बुराई नहीं porn industry का भी world level बहुत बड़ा market उपलब्ध हैं, किसी काम को करना ही है तो तो उसे पूरा करे या फिर ना करे.... जल्द ग्लैमर के चक्कर में ऐसे crimes हो जाते है जिसकी उम्मीद भी शायद किसी से ना कि होगी.
कोई भी अधूरा काम खतरे का सूचक हैं, अक्सर महिला मोर्चा की मठाधीश को ये बोलते हुए सुना है कि मर्दों को अपना स्टेट ऑफ माइंड बदलने की जरूरत है, छोटे कपड़े से नहीं छोटे दिमाग से क्राइम होता है, कपड़े बेशक छोटे हो चलेगा पर अधूरे हों तो शायद ना चले, अब छोटे और अधूरे मे फर्क़ क्या सवाल ये भी... छोटा वो जो शरीर के secrets part को कवर करे, अधूरा वो जो secrets parts ko cover करने के बावजूद भी आपको संभाल कर चलना हो ताकि कुछ दिख तो नहीं रहा हाँ.. बस इतना ही अन्तर है अधूरे और छोटे मे... यहि बात male और female दोनों के लिए सटीक बैठता है... पुरुष भी अधूरे कपड़ों मे बड़ा ही भद्दा दिखता है तो आप स्वयं ही सोचे लड़कियाँ अधूरे मे क्या दिखती होगी,
माना कि आज़ादी सबका अधिकार हैं पर कोई भी जीव या निर्जीव दोनों ही बिना पाबंदी के दिशाहीन होना स्वाभाविक है.. तो आज़ादी की भी सीमाएं निर्धारित की गई है जिसका पालन करना अनिवार्य है अन्यथा एक समय ऐसा जरूर आएगा इंसान ही इंसान को खा जाएगा, जिसकी शुरुआत हो चुकी हैं.
सोशल मीडिया एक ग्यान का विस्तार करने और सीखने का सबसे बेहतर माध्यम हैं, पर हम भारत के युवा कर क्या रहे हैं? क्या ये सोचने का मुद्दा नहीं है? हर लड़की - लड़का लगा हुआ है सोशल मीडिया में नंगा नाच नाचने मे.. मैं उन सभी सभ्य ल़डकियों से ये जरूर पूछना चाहूँगा, क्या जीवन का सारा रस सोशल मीडिया में तस्वीरे वो भी नग्न अपलोड के अलावा कुछ टार्गेट नहीं बचा है... और उन सभी मूर्खों से ज़रूर पूछना चाहूँगा जो उन वाहियात तस्वीरों पर vulgar comments देते हैं.... किस लेवल की मानसिकता के लोग इस देश में रहते है समझ नहीं आता I sex human being की life का important part है, virtual दुनिया मे satisfaction खोजते है जो आपको रियल दुनिया में criminals बना देता है किसी ना किसी रूप में....
Mental, physical, social, economical, sexual type satisfaction virtual दुनिया मे खोजना छोड़ कर real world में जीना सीखिए यही रियल ह्यूमन बीइंग की उपलब्धी हैं..... Real life in real world का ही concept universal concept है बाकी सब झूठ और महज़ एक सपना है जो दिखता है पर होता नहीं हकीकत मे......
लेख थोड़ा विरोधाभाषी हो सकता है, critics भी होंगे बहुत पर इसे सकारात्मक दृष्टि से लिया जाए तो एक बड़ा परिवर्तन लाने मे शायद कारगर साबित हो सके.
पाठकों से विशेष अनुरोध है कमेंट्स करते वक़्त शब्दों पर ध्यान रखें...
लेखक :
Er.RAM SINGH (CEO)
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