ये राजनीति शब्द भी समझ का ही खेल है इसका सीधा सा अर्थ है राजाओ की नीति जो प्रजा के हित के लिए हुआ करती थी जिसे हम राजा संबोधित करते आए है, तब और अब मे फर्क क्या आया तो इसे समझना होगा भारत के आवाम को, पहले राजाओं की नीति हुआ करती थी और अब चोरों /बेईमानों /जुमलेबाज़ो /भ्रष्ट विचारधारा वालों /रूढ़वादी मानसिकता वालों की चोरनितिय समाज में फैल गई हैं, और इनको पाल पोष कर बड़ा हम और आप लोगो ने ही किया है, ये लोग समाज का वो वो सढ़ा हुआ हिस्सा हैं जो सिर्फ़ मानसिक /आर्थिक /राजनीतिक /सामाजिक /व्याहारिक /हिंषात्मक तौर पर हमे कमजोर करने का षड्यंत्र रचते है, इन लोगो का कोई इमान धर्म नहीं होता, और ये भारत की आवाम इनके बहकावे में इतनी आसानी से आ जाती हैं देख कर ऐसा लगता है ये देश पढ़े लिखे जाहिलो से भरा हुआ है l और उससे भी बड़े वो मूर्ख है जो खुद को इंसान की औलाद बताते है समाज मे घूम घूम कर और उनके काम किसी शैतान से कम नहीं,मानो लगता है खुद की पैदाइश पर भी उनको शक है कि वो इंसान है या शैतान, पर इंसानी रूपी समाज में रहते हुए खुद को भूले से इंसान की औलाद बोल दिया करते हैं, अगर सच में वो इंसान होते तो इतना संक्रमण किस बात का फैला हुआ है, चारो ओर दर्द से कराहती आवाज़ें, भूख से मरते हुए लोग, बेरोजगारी से बिलखती युवा पीढ़ी के लोग, इतनी नफ़रत तो आज़ादी के विगूल में भी नहीं था जितनी अब है, तब कोई नेता मारे तो पूरा देश स्तब्ध रह जाता और आज कोई मारे तो ज़श्न का खोलाहल सुनाई देता है, ये देख कर लगता नहीं कि कोई नेता मारा लगता है कोई अवारा कुत्ता मर गया जो अनायास ही लोगो को काट लिया करता और आज उससे मुक्ति मिल गई, तो भारत के अग्रणी विकाशोउनमुखी समाज के युवा पीढ़ी के लोगो ऐसा अवारा कुत्ता जो सिर्फ काटने के लिए पैदा हुआ है उसे पाल पोष कर बड़ा ही क्यो करते हो,
आज के समाज की परिस्थिति को पिछले एक दशक से तुलना करे तो अन्तर समझने में तनिक देर नहीं होगी,
ये मेरे विचार है जिसका संबंध किसी व्यक्ति विशेष या कि समुदाय से नहीं है..............
By: Er. Ram Singh, Delhi

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