पानी "
एक ग्लास में थोड़ा पानी रखा हुआ था, कुछ कि नज़र में आधा भरा और कुछ कि नज़र में आधा खाली होगा, ये उस ग्लास में रखे हुए पानी को देखने के नज़रिए पर आश्रित है, परंतु सवाल कुछ अलग है, मेरे लिए ये माँयने नहीं रखता की कितना खाली या भरा है, बात इतनी सी है कि वो कितना भारी है, अब सवाल आता है कि आप उसे थोड़े समय के लिए हाथ में रखेंगे तो हल्का होगा, थोड़ा और देर तक उठा के रखा रहे तो कुछ भारीपन आएगा, थोड़ा और देर तक उठा के रखा जाए तो थोड़ा और भारी होगा और थोड़ा बहुत हाथ में शायद दर्द महसूस हो, यदि 24 घंटे तक हाथ में उठा के लगातार रखा जाए तो क्या होगा ? उस समय जरूरत से ज्यादा भारी और तनाव से भरा, उलझन बहुत महसूस होने लगेगी, जबकि ग्लास में रखे हुए पानी का वजन उतना अब भी है जितना पहले था, हमे शुरुआत में भारहीन, फिर वक्त बढ़ता गया और भारीपन भी साथ साथ बढ़ता गया, शायद मै बिल्कुल सही हूँ :- अब हम इस बात जो जीवन से जोड़ कर देखे फिर ऊपर लिखी बात का मक़सद स्पष्ट समझ में आएगा, आइए हम समझते हैं ये क्या है ?
जीवन में तनाव और चिंता बिल्कुल उसी ग्लास में रखे हुए जल की ही तरह हैं, जितना वक्त हम उसे उठा के अर्थात पकड़ कर रखेंगे वो उतना ही भारी समय के साथ होता जाएगा और चिंता - तनाव भी बढ़ता ही जाएगा, जिससे और अन्य समस्याएं जीवन में आती जाएंगी, और हम और मुसीबतों में फसते ही चले जाएंगे, चिंता और तनाव उड़ते पंछी की तरह ही होते हैं, आएंगे और चले जाएँगे पर हमे उसे ज्यादा समय तक कोशिश करे कि पकड़ कर ना रखे, पंछी को पकड़ लेंगे तो उड़ नहीं पाएगा और आप परेशान ही रहेंगे, जीवन में कोई समस्या अगर आ गई तो ये यकीन रखे की ये मौसमी पंछी है समय ख़तम होने पर इनको तो उड़ना ही है, उसी तरह से पानी के ग्लास का भार ना उठा कर उस पानी का इस्तेमाल करके ग्लास को छोड़ दे, इससे हमें ये समझ आया कि जीवन में खुशहाली चाहिए तो चिंता - तनाव रूपी ग्लास को लंबे समय तक उठा कर रखने की कोशिश ना करे और इनको अज़ाद पंछी की तरह उड़ जाने दे और आप भी खुश रहे और अपनो को भी खुश रखे I
हमारा मूल उद्देश्य ये था कि अपनी छोटी से कहानी से जीवन के शार को समझा जाए औरो का भी मार्गदर्शन किया जाए I
धन्यवाद
Er.RamSingh (GURU)
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