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Support our Indian Army: ONE COIN MISSION DRIVE

Support our Indian Army ONE COIN MISSION DRIVE (जय जवान जय हिंदुस्तान) As all Indian Knows we SAFE Org. are launching our ONE COIN MISSION DRIVE will going to run from 01/Jul/20 to 14th Aug 20, Our Mission for the families of the martyred soldiers will be supported for the protection of the martyrs on the Indo-China border, we request all 135 crore Indians to give a grant of only Rs 1/- Follow the duty of being and ensure that all India stands with the Indian Army. This will be a true tribute to all of you Indians and will also help the families of all those martyrs, as well as the campaign of Boycott China, which can also be made effective. Whatever amount of donation will come, it will be handed over in equal parts to the families of those soldiers through checks and the remaining amount will be deposited in the Martyrs Welfare Fund of the Indian Army. The information of which was given to you through social media. Will all the Indians support us in this mission for all those In...

CH-24: ONE COIN MISSION DRIVE-Vote For Indian Army

Vote for Indian Army ONE COIN MISSION DRIVE SAFE Organisation- Want suggestion from all Indians T he suggestion is as follows: - SAFE Org. ONE COIN MISSION DRIVE is going to run, in which a few days ago, the families of the martyred soldiers will be supported for the protection of the martyrs on the Indo-China border, we request all 135 crore Indians to give a grant of only Rs 1 / - Follow the duty of being and ensure that all India stands with the Indian Army. This will be a true tribute to all of you Indians and will also help the families of all those martyrs, as well as the campaign of Boycott China, which can also be made effective. Whatever amount of donation will come, it will be handed over in equal parts to the families of those soldiers through checks and the remaining amount will be deposited in the Martyrs Welfare Fund of the Indian Army. The information of which was given to you through social media. Will all the Indians support us in this mission for all those Indian s...

CH-31: राजनीति या कूटनीति

राजनीति या कूटनीति ये राजनीति शब्द भी समझ का ही खेल है इसका सीधा सा अर्थ है राजाओ की नीति जो प्रजा के हित के लिए हुआ करती थी जिसे हम राजा संबोधित करते आए है, तब और अब मे फर्क क्या आया तो इसे समझना होगा भारत के आवाम को, पहले राजाओं की नीति हुआ करती थी और अब चोरों /बेईमानों /जुमलेबाज़ो /भ्रष्ट विचारधारा वालों /रूढ़वादी मानसिकता वालों की चोरनितिय समाज में फैल गई हैं, और इनको पाल पोष कर बड़ा हम और आप लोगो ने ही किया है, ये लोग समाज का वो वो सढ़ा हुआ हिस्सा हैं जो सिर्फ़ मानसिक /आर्थिक /राजनीतिक /सामाजिक /व्याहारिक /हिंषात् ‍ मक तौर पर हमे कमजोर करने का षड्यंत्र रचते है, इन लोगो का कोई इमान धर्म नहीं होता, और ये भारत की आवाम इनके बहकावे में इतनी आसानी से आ जाती हैं देख कर ऐसा लगता है ये देश पढ़े लिखे जाहिलो से भरा हुआ है l और उससे भी बड़े वो मूर्ख है जो खुद को इंसान की औलाद बताते है समाज मे घूम घूम कर और उनके काम किसी शैतान से कम नहीं,मानो लगता है खुद की पैदाइश पर भी उनको शक है कि वो इंसान है या शैतान, पर इंसानी रूपी समाज में रहते हुए खुद को भूले से इंसान की औलाद बोल दिया करते हैं, अगर सच ...

CH-30: Concept of Reservation

Concept of Reservation- आरक्षण मिटाओ देश बचाओ आज कल ये नारा चिल्ला चिल्ला के गली गली - मोहल्ला मोहल्ला सुनाई दे रहा है तो लो भाई आरक्षण मिटाने का अचूक नुस्खा - आरक्षण खत्म करना चाहते हैं या आर्थिक आधार पर जारी रखना चाहते हैं तो बहुत साधारण तरीके से हो सकता है भाई...... आरक्षण का लाभ लेकर जितने दलित बेहतर सामाजिक स्थिति में आ चुके हैं उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराकर उन्हें ब्राह्मण जाति दे दीजिए .. वे आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाऐंगे ! फिर उतनी ही संख्या में गरीब बामन बनिये जो भी आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं वे भंगी / चमार / मेहतर जैसी जो जाति का लाभ लेना चाहते हैं वे उस जाति के दलितों में अपनी बेटी बेटे की शादी कर उनके साथ खाना खाएं / उनके साथ रोटी बेटी का रिश्ता कर दलित हो जाएं और आरक्षण का लाभ ले लें .. ये हर साल हो .. होनी चाहिए .. कोई आरक्षण चाहता है तो आजादी के इतने सालों बाद भी जारी जातिप्रथा का दंश भी तो झेले .. जिससे आर्थिक आधार पर आरक्षण छीना जाने की वकालत हो रही है उसे सामान्य जाति का बामन बनिया होने का हक भी तो दीजिए क्योंकि आरक्षण से बाहर होने के बाद तो वो सामान्य जाति का हो...

CH-29: Death Is Getting Cheaper

मौत सस्ती होती जा रही है Death Is Getting Cheaper "जीवन का नैतिक मूल्य इसमें ही है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार के नाकाम रहने पर सवाल पूछा जाए" 20 नवंबर को राजस्थान के अलवर में ट्रेन के आगे छलांग लगाकर तीन नौजवानों का खुदकुशी करना हाल में भारत में हुई ऐसे मौतों की एक भयावह कड़ी है. नैतिकता के लिहाज से देखें तो भारत के लोगों को मौत के विचार को नए सिरे से देखना होगा. इस पर विचार करना होगा कि लंबा जीवन जरूरी है या फिर किसी अच्छे मकसद से कम समय का जीवन ज्यादा अच्छा है. किसी की जिंदगी को तब ही मकसद मिलता है जब वह अपने काम को रचनात्मक दायरे में ले जाए. इसके लिए अनुकूल अवसरों की जरूरत होती है. ताकि सही ढंग से मानसिक और शारीरिक क्षमताओं का विकास हो सके. इससे अपनी अहमियत समझने की क्षमता विकसित होती है. यह क्षमता तब बेहद कम हो जाती है जब व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों से घिर जाए. युवाओं को इस समस्या का सामना अधिक करना पड़ रहा है. क्योंकि उनकी आकांक्षाएं अधिक होती हैं. उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ते जा रहा है और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को ही भविष्य सुरक्षित करने का एकमात्र माध्यम माना जा रहा ह...

CH-28: "एक अनुभव" HIDDEN PHASE OF SOCIAL MEDIA

"एक अनुभव" एक समय था जब लोगो के पास डिजिटल ग्रुप सिस्टम नहीं था फिर भी कोसो मील दूर रह कर भी लोग एक दूसरे के लिए तत्पर रहा करते थे और बिना किसी स्वार्थ के और आज का तो ये बुरा हाल है कि ग्रुप में टाइम पास करना एक कल्चर सा बन गया है, किसी बकवास मुद्दे पर उल्टे सीधे कमेंट तक ही लोगो का दिमाग चोक हो चुका है, ऐसी मानसिक गुलामी से शिकार बन चुके हैं जिससे उबर पाना नामुमकिन ही है अब तो, पहले लोगो का रिश्ता इस बुनियाद पर हुआ करता था कि मै किसी के सुख मे रहू ना रहू पर यदि दुःख मे साथ खड़ा होने का अवसर मिले तो जीवन मे कुछ सन्तोषजनक किया ऐसा खुद को महसूस हो, पर आज के दौर में रिश्ता उसी दिन से कमजोर होने लगता है जिस दिन आपके सहयोगी ने आपसे कुछ सहयोग मांग लिया फिर क्या तुरंत जी चुराना, कन्नी काटने का प्रचालन सुरू होने लगता है, अक्सर सुना होगा ये कहते लोगो से की मै तुम्हारे साथ हमेशा खड़ा हूँ परंतु जब आप कभी गलती से साथ मांग भर ले तो आपको खुद ही मालूम है क्या जवाब आएगा उसे बताने की जरूरत नहीं I अब क्या हम वाकई में सच्चे इंसान या दोस्त होने का दावा करते हैं, वो कितने हद तक सार्थक दावेदारी ...

CH-27: क्यों डरा है ?

"क्यों डरा है ? " क्यों डरा है देश का बहुत बड़ा हिस्सा जो सदियों से पीड़ित, डरा हुआ और सहमा हुआ है आखिर ऐसा क्यों है ? इस बात को समझना बहुत ही जरुरी है , देश का बहुत बड़ा हिस्सा मध्यम वर्गीय है ,इनके डर का सबसे बड़ा कारण है इनका समाज का हिस्सा होते हुए भी अकेला होना ,सिर्फ बातो में संयुक्त रूप से नज़र आते है पर जिमिनी स्तर पर ये बिलकुल अकेला और तनहा होता है I ऐसा तबका जो आतंरिक रूप से अकेला होने के साथ-साथ पारिवारिक रूप से भी सहयोग नहीं प्राप्त कर पता I ऐसा कोई स्तर नहीं है जहाँ ये डरता न हो और हो भी क्यों ना इनके पीछे कोई इनको सँभालने वाला भी तो नहीं होता, बस गिरने का जो डर है पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहता है जो सिलसिला थमने का नाम तक नहीं लेता I इन हजारों लोगो में गलती से मुट्ठी भर हिम्मत दिखाता भी है तो किसी न किसी रूप में दबा दिया जाता है जो बिलकुल परंपरागत व्यवस्था है I पैदा होने से मरने तक का हर डर उनको ना चैन से जीने देता है और ना ही मरने देता है I ये तबका आखिर करे भी तो क्या करे, इनकी ज़िन्दगी हमेशा किसी न किसी के आधीन ही रहती है, और तो और इन लोगो की ऐसी मानसिकता भी विकशित...