# लेख को पूरा जरूर पढ़े ये हर उस इंसान की दास्तान है जो ज़मीन पर रहता है #
जात पात पर अगर कोई लड़ाता हैं तो चंद मुट्ठी भर लोग, और लड़ता कौन हैं पूरा देश, तो दोषी कौन हुआ ? वोटों की राजनीति कितने करते हैं चंद मुट्ठी भर लोग, और आपस में कूटनीति का शिकार कौन बनता है तो दोषी कौन हुआ? एक मंच पर खड़ा होकर झूठ बोल कर निकल जाता है, गुमराह कौन होता है, तो सोचो दोषी कौन हुआ? किसी मजलूम को सताने वाले कितने लोग, कुछ मुट्ठीभर लोग, और उसका साथ ना देने वाले कितने हैं, तो दोषी कौन हुआ? कोई मरता है तो मरने दो कोई बात नहीं हम तो ठीक है, ऐसी सोच कौन रखता है, तो दोषी कौन हुआ? एक दोषी नेता को बचाने सारे मिलकर बचाते है, और भीड़ में निर्दोष को कुचलने वाले कौन है, तो दोषी कौन हुआ? , सोच कर कूटनीति करते है चंद मुट्ठी भर लोग और बिना सोचे-समझे उनके पीछे हड्डियों के टुकड़े के लिए भागता कौन है तो दोषी कौन हुआ? , सरकार तुम्हें चलती है तुम सरकार बनाते हो, खुद के हाथो से बनाई व्यवस्था से डरता कौन है, तो बताओ दोषी कौन हुआ?
सच की आवाज को उठाने वाले हममे और आपमे से कोई होता है, उसकी आवाज को दबाने के लिए कौन सत्ताधारियों के साथ अपने ही खिलाफ मैदान में भीड़ जुटाता है वो कौन है, तो दोषी कौन हुआ? जानते हो देश में लोकतंत्र ही देश को चलाता है पर उसी लोकतंत्र को तोड़ने और बर्बाद करने के लिए बड़ी बड़ी ज़न सभाओं मे जाकर उसकी शोभा कौन बढ़ाता है, फिर बाद मे ख़ुद ही शोर मचाता है ये अन्याय क्यों, तो कौन हुआ दोषी कौन हुआ?
कभी देखा है एक चोर को दूसरे चोर फांसी देते हुए, नहीं सायद, घर की बहू बेटियों की सारे आम इज़्ज़त जब उछाली जाती है तो बेशरमी से कौन तमाशा देखता है, तो बताओ दोषी कौन हुआ? , चंद रुपये, दारू, के लिए अपने अधिकारों की दलाली कौन करता है तो दोषी कौन हुआ भाई? क्यों किसी और को गाली देते हों, मारते हो, सारे आम कत्ल करते हो जब इन सभी सवालों का सही जवाब मिल जाएगा तो खुद पर शर्म जरूर आएगी, और दोषी अपने आप नज़र आएगा, जब आईना देखोगे.... खुद का ज़मीर अगर मरा हुआ पाओ तो समझ लेना तुम ही सबसे बड़े दोषी हों, ये चंद मुट्ठी भर लोगों तुम बस single used plastic की तरह इस्तेमाल करते हैं और तुम सोचते हों उनका चुंबन तुम्हें मिला है, उसी मे थूक कर तुमको कूड़े के ढ़ेर मे डाल देते है और फिर पूरी ज़िन्दगी उसमे सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हों.... दोषी मत खोजो क्योंकि वो तुम खुद ही हो, जिसके भुक्त-भोगी तुम हर रूप में बनते आए हों,अगर नहीं सुधरे तो ऐसे सड़ते हुए जीना तुम्हारा अपना चुनाव है, तो ये बताओ कौन सा युग बेहतर हैं, आज जो तुम सब मिलकर बनाए हो या अभी भी मन नही भरा तो हैवान जब तक नहीं बनोगे तब तक नहीं मानोगे.... जिस दिन दोषी ढूंढना बंद कर दोगे उस दिन से नए भारत का आगाज होगा l
लेखक -
राम सिंह (प्रेसिडेंट)
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